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Friday, March 4, 2016

नरेंद्र मोदी और को पीछे छोड़ते हुए कन्हैया कुमार का सोशल मीडिया पर वर्ल्डवाइड ट्रेंड कर जाने के कुछ तो मायने हैं.

कन्हैया जेल से जमानत पर रिहा कर दिये गये. उन पर केंद्र सरकार ने देश से बगावत का इल्जाम लगाया था. कन्हैया के तिहाड़ से निकलते ही जहां जेएनयू समेत पूरे देश में  जश्न का माहौल था वहीं गुरूवार रात होते- होते सोशल मीडिया में हैशटैग कन्हैया कुमार वर्ल्डवाइड ट्रेंड करने लगा.
खास बात यह है कि अमेरिका में उभरते हुए नेता डोनाल्ड ट्रम्प तो ट्रेंड में पीछ छूट ही गये, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का संसद में  जोर शोर से दिया गया बजट सत्र का भाषण भी ट्रेंडिंग में पीछे छूट गया.

कन्हैया कुमार की जमानत पर रहिाई की खबर फैलते ही सोशल मीडिया में लाखों लोगो ने अपनी प्रतिक्रिया और कन्हैया के समर्थन में कमेंट करने लगे. भारत का मेनस्ट्रीम मीडिया, सोशल मीडिया के इस रौ को भांपते हुए मजबूर हुआ और तमाम चैनलों ने अपनी टीम जेएनयू भेज दी जहां कन्हैया की रिहाई का जश्न चल रहा था. इस अवसर पर कन्हैया ने एक घंटे की स्पीच दी और फिर वही नारे लगाये जिन नारों को फेरबदल कर टीवी चैनलों ने देश को सुनाया था- संघवाद से आजादी, मनुवाद से आजादी, मोदी राज से … हम ले के रहेंगे आजादी.
इस भाषण के दौरान कन्हैया ने स्पष्ट किया कि देश के संविधान में उनका पूरा भरोसा है. उन्हें भारत से आजादी नहीं, बल्कि भारत में आजादी चाहिए.
कन्हैया का जेएनयू में दिया गया यह भाषण हजारों की संख्या में लोग शेयर कर रहे हैं. सोशल मीडिया में जो प्रतिक्रियायें आ रही हैं उसमें अधिकतर लोगों का मानना है कि  आरएस, संघवाद, साम्प्रदायिकता, कार्पोरेटवाद के विरोध के प्रतीक के रूप में कन्हैया कुमार नामक युवा मिल गया है

Thursday, March 3, 2016

मुझे देश से नहीं देश में आज़ादी चाहीए : कन्हैया कुमार

कन्हैया कुमार JNU मे

कन्हैया के घर जशन में मोहम्मद मुसलिम और अन्य
जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार गुरुवार शाम तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। उन्हें 20 दिन पहले ‘देशद्रोह’ के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। कन्हैया को बुधवार के दिन  अदालत ने ज़मानत दी थी। वे जब जेएनयू के परिसर में पहुंचे तो वहां उन्हें छात्रों और शिक्षकों ने उनका ज़ोरदार  स्वागत किया। कन्हैया के स्वागत में बड़ी तादाद में छात्र नारेबाजी कर रहे थे और हाथों में नारे लिखी तख्तियां लिए हुए थे।


कन्हैया ने देर रात कैंपस में भाषण दिया। अपने भाषण में उन्होंने केंद्र सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधा। कन्हैया ने कहा की सरकार जेएनयू को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा हमें भारत से नहीं भारत में आज़ादी चाहीए

उन्होंने अपने भाषण के दौरान भारतरत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भी याद किया। उन्होंने कहा की उन्हें भारतीय संविधान पर पूरा भरोसा है।  कन्हैया ने अदालत पर भी भरोसा जताया।

आपको बता दें की देशद्रोह के आरोप में 12 फरवरी को कन्हैया की गिरफ्तारी हुई थी। कन्हैया पर आरोप है कि उन्होंने जेएनयू परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में देश विरोधी नारे लगाए थे। कन्हैया ने इस आरोप से बार-बार इनकार किया है।

उधर, दिल्ली सरकार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में नौ फरवरी को आयोजित एक कार्यक्रम में हुई देश-विरोधी नारेबाजी और जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार में कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है।




Friday, February 19, 2016

JNU विवाद:पूरे बिहार के छात्र एवं युवा कन्हैया के साथ खड़े है-तेजस्वी

पटना। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने जेेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष पर देशद्रोह के आरोप लगाने के मामले पर बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा है कि देशभक्ति की ठेकेदारी तो केवल केंद्र में बैठे लोगों के पास है, दूसरी पार्टी के लोग तो देशद्रोही हैं। तेजस्वी ने कहा कि यह विचारधारा की लड़ाई है। इसमें किसी पर हमला और न्याय की बात कहां से आ गई? इस बारे में हमें प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है।
इससे पहले तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर अपने 'दिल की बात' सीरीज में भाजपा पर जमकर हमला किया। तेजस्वी ने ट्वीट किया, "भाजपाई छद्म राष्ट्रवाद की विफलता को उजागर करने के लिए मै दिल की बात के साथ हाजिर हूं। इसके तहत लेखों को पढकर आप इस बारे में अपनी प्रतिक्रियो दे सकते हैं।"
  "बिहार के कन्हैया कुमार का क्या दोष था? बीजेपी कभी साबित नहीं कर पायेगी।
पूरे बिहार के छात्र एवं युवा कन्हैया के साथ खड़े है।"
अपने अगले ट्वीट में तेजस्वी ने लिखा है कि बीजेपी को युवाओं के डेमोक्रेटिक राइट्स व स्पेस में दखलदांजी नहीं करनी चाहिए।
  "BJP युवाओं के डेमोक्रेटिक राइट्स व स्पेस में दखलदांजी बंद करे अन्यथा जिस दिन इस देश के सारे छात्र एवं युवा एक हो गए आपको कोई ठौर नहीं मिलेगी।"
तेजस्वी ने अपने अगले ट्वीट में भाजपा से कहा है कि आपके स्कूल ऑफ़ थॉट से हमें देशभक्ति का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
  "हम देशभक्त है,बाबासाहेब के संविधान व लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं। आपके"स्कूल ऑफ़ थॉट" से हमें देशभक्ति का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।

Wednesday, February 17, 2016

JNU : अपना नाकामी छिपाने के लिए खुन का खेल

प्रकाश नारायण सिंह

सियासत के कायदे वही हैं जो राजनीति को रास्ता दिखाएं. जीत के जज्बे को पैदा करने से लेकर सत्ता हथियाने तक धर्म, जाति और ‘राष्ट्रवादी हुंकार’ एक अहम जरिया रहा है.

जब आप जीते थे तो आप सभी की स्याही से सूबे की तकदीर लिखने की उम्मीद थी. आप लोगों की महत्वकांक्षा के नाग ने सच्चे लोकतंत्र को, गरीबी को, भूख को, सुरक्षा को, इंसानियत को, मानवता को डंस लिया. हां, हमारे सियासी मालिक आप ही की बात कर रहा हूं. भय को, भूख को, भ्रष्टाचार को दफनाने के बजाए आप सभी ने हमारी उम्मीदों को दफना दिया. हमने तो आपको अपना हुक्मरान माना, आपको सिर आंखों पर बैठाया, अपनी समस्याओं का समाधान बनाया लेकिन आप उत्पीड़ित अस्मिताओं के निर्मम शोषण का उपकरण बन गए सियासी मालिक.. बताइए ना हमसे चूक कहां हो रही है. समझाइए अब हम क्या करें..

राष्ट्रभक्ति का सर्टिफिकेट आप तो मत ही दीजिए?

फिलहाल ‘हस्तिनापुर’ की सियासत कठघरे में है. विकास के मुद्दे पीछे छूट गए. धर्म और ‘राष्ट्रवादी हुंकार’ का कॉकटेल बनाया जा रहा है. आम लोगों के मुफलिसी के इस दौर में महंगी आलीशान गाड़ियों में सुरक्षा घेरे के बीच चलना और सियासी शिगूफे छोड़ अपना वर्चस्व साबित करने की कोशिश करना कथित राष्ट्रवादी और धार्मिक ठेकेदारों का अहम पेशा रहा है. ठेकेदारी की ये दुकान छोटी से लेकर बड़ी तक है. जिसकी जैसी दुकान उसकी सियासत में उतनी हिस्सेदारी. विहिप, बजरंग दल से शुरू हुई ये सियासी सेना श्रीराम सेना, ये सेना वो सेना पता नहीं कौन कौन सेना तक बन गई…..आजकल तो हमारे यूपी में तीर धनुष की ट्रेनिंग दी जा रही है आईएसआईएस से लड़ने के लिए.. अरे भाई जब तीर धनुष ही काफी हैं तो भारतीय सेना क्या धान काटेगी? क्या इनको भारतीय सेना पर भरोसा नहीं रहा? खैर.. फिलहाल मुद्दा ये नहीं है.

मैं पहले ही साफ कर दूं कि संविधान के खिलाफ हर नारे का मैं विरोध कर रहा हूं. लेकिन इन नारों के सहारे जो सियासत हो रही है उसे बेहद खतरनाक मानता हूं. बंद करिये सर्टिफिकेट देना.. ये देशद्रोही वो देशद्रोही.. मैं ज्यादा राष्ट्रभक्त.. मैं हिन्दू भक्त.. मैं फलां भक्त.. अरे मैं से बाहर निकलिए और हम के बारे में सोचिए. जेएनयू जैसे विश्वविद्यालय से रोशनी निकलती है. और रोशनी का वजूद ही अंधेरे के खिलाफ प्रतिरोध है. धर्मांध और कट्टर लोगों के मन में इस विश्विद्यालय के लिए बराबर नफरत क्यों पलती है? शटडाउन जेएनयू का हैशटैग कितना खतरनाक है ये सोचकर ही मन कांप जाता है. राष्ट्रवादी समय में ‘हम’ और ‘वो’ शब्द बेहद शातिरता के साथ इस्तेमाल किए जा रहे हैं. आम लोगों और देश के बीच की रेखा को भी धुंधला किया जा रहा है. बस जो आपके विचार के साथ नहीं है वह देशद्रोही. ये कैसा सर्टिफिकेटवाद है साहब. मेरा सिंगल सवाल.. नारों के मास्टर माइंड को पकड़ने के लिए क्या अब एफबीआई के जवान आएंगे! आपकी रॉ से लेकर दिल्ली पुलिस तक के हत्थे वह क्यों नहीं चढ़ रहा है? दिल्ली पुलिस महज चंद घंटे में जेएनयू के प्रेसिडेंट कन्हैया को गिरफ्तार करती है जिसका नारे लगाते कोई अभी तक वीडियो भी नहीं आया लेकिन जो नारे लगा रहे थे उन्हें अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है. उनको आप गिरफ्तार करने से क्यों बच रहे हैं. हमें पता है कि कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार बनाने के लिए बन रहे माहौल में दिक्कत आएगी. सत्ता के लिए देशभक्ती का तड़का मत लगाइए. ये आग से मत खेलिए हुजूर.. आपके बच्चे तो ऑक्सफोर्ड में पढ़ते हैं. कमांडों की सुरक्षा के बीच में रहते हैं.. हमारे बच्चे जलेंगे.. मरेंगे.. और कटेंगे.

कानून के रक्षक संस्कृति के रक्षक बन कर पटियाला हाउस कोर्ट में पत्रकारों के साथ मारपीट की. और उतना ही नहीं आपके विधायक जी तो ऐसे ‘कथित आत्मरक्षा’ में पीटाई करने लगे जैसे मुंबईया डॉन हों. वकीलों की आड में आपके ‘सेवकों’ की करतूत से भारत मां गौरवान्वित होंगी.. क्यों हुई होंगी न.. बोलिये ना.. आप नहीं बोलेंगे क्योंकि आपको उतना ही बोलना है जिससे की सत्ता हथियाने में सफलता मिलती रहे. हमें पता है कि निरंकुश होने की चाह वाली किसी भी सत्ता की आंख में सबसे पहले पत्रकार, लेखक और बुद्धिजीवी ही खटकते हैं. क्योंकि यही वे लोग हैं जो सत्ता की पोल खोलते हैं. जनता की आवाज को सत्ता के गलियारे में शोर बनाते हैं. और मधुर संगीत के साथ सोमरस में डूबी मदहोश सत्ता को कर्कश शोर से चिढ़ होती है.

लोकतंत्र का ये हिस्सा भी पढ़ लीजिए!

मुझे तो बस इतनी भर इल्तिजा करनी है कि शोर और चीत्कार के बीच कुछ आवाजें कहीं सहमी और दुबकी हुई हैं. बेआवाज की मानिंद बस उस बेआवाज की आवाज सुन लीजिए. बेशक होंठ सिले नहीं गए हैं लेकिन आपके गुंडों की खौफ से लरज रहे हैं. आप समझ रहे हैं न..आप तो मजलुम के घर पैदा हुए थे. आप गरीब और कमजोर के डर को महसूस कर रहे हैं साहेब.

सुनिए जवाहरलाल नेहरू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया की मां ने कहा है, “हमें जब से पता चला है कि कन्हैया को गिरफ्तार कर लिया गया है, तब से हम लगातार टीवी देख रहे हैं. मुझे उम्मीद है कि पुलिस उसे बहुत ज्यादा नहीं पीटेगी. उसने कभी भी अपने माता पिता का अपमान नहीं किया, देश की बात तो भूल ही जाइए. कृपया मेरे बेटे को आतंकवादी नहीं बोलिए. वह यह नहीं हो सकता है.” मीना एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं और साढ़े तीन हजार रूपये प्रति माह कमाती हैं. उनके 65 वर्षीय पति लकवाग्रस्त होने की वजह से सात सालों से बिस्तर पर हैं.

आप तो संसद में घुसे तो कैमरे की चमकती रोशनी में माथा टेका. कसम से.. मेरा दिल भर आया. मैं उसे ड्रामा नहीं समझा. चलिए अब आपको कुछ लोकतंत्र का इतिहास दिखाता हूं. देख लीजिएगा चश्मा साफ करके. 1965 में जब अमेरिका ने वियतनाम के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा था, तब अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में ही ऐसे लेक्चर्स की शुरूआत की जिसमें लड़ाई के खिलाफ बातें की जाती थीं. लेकिन उनके इस विरोध को न ही देशद्रोह माना गया और न उन पर कोई कार्रवाई हुई बल्कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें उसे जारी रखने की इजाजत दे दी.

1965 से 1973 के बीच पूरे अमेरिका के विश्वविद्यालयों में वियतनाम युद्ध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होने लगे, छात्रों ने इस दौरान अमेरिकी झंडे भी जलाए. लेकिन तब भी किसी पर देशद्रोह का मुकदमा नहीं किया गया. सिर्फ उन छात्रों को गिरफ्तार किया गया जो सीधे तौर पर हिंसा में शामिल थे. इसी तरह फरवरी 2003 में इराक युद्ध के खिलाफ भी अमेरिकी विश्वविद्यालयों में छात्रों ने प्रदर्शन किया लेकिन तब भी छात्रों के उस विरोध को देशद्रोह की श्रेणी में नहीं रखा गया.

आर्थिक मुदे पर नाकाम है सरकार?

अब हम आपको बताएंगे कि जेएनयू जैसे विवाद अब रोज आप क्यों चमकाएंगे. खैर चलिए कुछ उस पर आपका ध्यान दिला दूं जो आपको करना था लेकिन किये क्या.. देश की आर्थिक नब्ज बताने वाले शेयर बाजार का सूचकांक सेंसेक्स फिसलकर उस स्तर से भी नीचे पहुंचा हुआ है, जिस स्तर पर मोदी सरकार ने सत्ता संभाली थी. प्रसिद्ध इतिहासकार राचंद्र गुहा के इस ट्वीट पर ध्यान दीजिए..

The comments by the Home and HRD Ministers on JNU only demonstrate that in this Cabinet, patriotism is the first refuge of the incompetent.

— Ramachandra Guha (@Ram_Guha) February 13, 2016
रुपया भी सबसे निचले स्तर के करीब है. एक डॉलर की कीमत करीब 68 रुपए है. औद्योगिक विकास दर भी लाल निशान दिखा रहा है. मई 2014 में 4.7 फीसदी रहने वाली औद्योगिक विकास दर दिसंबर में माइनस 1.3 फीसदी रही. इस साल आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी का अनुमान भी भी घटाकर सात से साढ़े सात फीसदी के बीच कर दिया गया है. पहले इसके आठ से साढे आठ फीसदी के बीच रहने का अनुमान था. सरकारी बैंकों का बढ़ता घाटा भी मोदी सरकार की मुश्किल बढ़ा रहा है. दिसंबर में खत्म तिमाही में आठ सरकारी बैंकों का घाटा कुल मिलाकर दस हजार करोड़ के पार पहुंच गया है.

सरकार ने पिछले बजट में राजस्व घाटा 3.9 फीसदी तक ले आने का अनुमान रखा था. लेकिन एक तो सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने से उम्मीद से कम कमाई हुई है. वहीं सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के साथ-साथ वन रैंक वन पेंशन के लिए अतिरिक्त प्रावधान करने के मोर्चे पर भी परेशानी है. इसका हल सरकार किस तरह निकालती है, ये तो 29 फरवरी के बजट से साफ हो सकेगा. साल 2015-16 में आयकर और कॉरपोरेट टैक्स जैसे डायरेक्ट टैक्स से कमाई में भी 40 हजार करोड़ की कमी आने का अनुमान है. हालांकि पेट्रोल और डीजल पर लगातार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर और सर्विस टैक्स जैसे इनडायरेक्ट टैक्स से सरकार किसी तरह तय लक्ष्य के मुताबिक कमाई कर पाएगी. काले धन के मोर्चे पर भी सरकार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी. विपक्ष के आरोपों के बीच उद्योग जगत भी दबे मुंह कह रहा है कि योजनाएं जारी करने से ज्यादा उनके अमल पर ध्यान देने की जरूरत है.

वोटों की गुल्लक भरने वाली सियासत!

‘कांइयापन’ के ‘स्विंग’ से अक्सर हम भोले हार जाते हैं! वोटों की गुल्लक को भरने के लिए रथयात्रा निकाले गए. दो भाइयों को हिन्दू और मुसलमान में बांटा गया. तहजीब पर कई जगहों पर दंगों के रूप में तमाचे पड़े. ये देश अंदर और बाहर से आग में धधकने लगा. कई जगहों पर इंसानियत को गहरे जख्म मिले. और फिर शुरू हुई वोटों की फसल काटने का सिलसिला..हर चुनाव में.. या जब आर्थिक नाकामी घेरती है तो राष्ट्रभक्ती जागती है. गाय भक्ती तो बिहार चुनाव में जगी ही थी. उससे पहले यूपी विधानसभा चुनाव में लव जिहाद का लिटमस टेस्ट फेल हुआ था.

‘हम भारत के लोग’ पता नहीं कब जाति, धर्म और ‘हुंकार’ पर समझदार होंगे. हम कब भूख, भय और भ्रष्टाचार पर सही समय पर सही निर्णय लेंगे? हम कब वोट की चोट को व्यवस्था के कोढ़ पर मारेंगे? मुझे समझ नहीं आता कि हम कब सच्चे अर्थों में ‘लोकतंत्र का राजा’ बनेंगे?


देश को ताड़ने का काम कर रही है बीजेपी : मुस्लिम




आल इंडिया तंज़ीम ए इंसाफ के राष्ट्रीय कौंसिल के सदस्य श्री मोहम्मद मुस्लिम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी देश मे वो कानून लाना चाहती है जो नागपुर मे तयार हुई है,अपनी कमज़ोरी को छुपाने के लिए बीजेपी दूसरे को देश द्रोही कह रही है। 

मुस्लिम ने कहा देश में आपात्कालीन जैसी हालत है।  बीजेपी सरकार देश कि एकता और अखंडता को भांग करना चाहती है यही वजह है कि इस सरकार मैं धार्मिक दंगे बहुत हो रहे हैं। लोगों में खौफ का माहौल है।  एक दिल्ली का एक बीजेपी  विधायक ओ पी शर्मा कन्हैया कुमार को पटयाला हाउस  अदालत  के  परिसर में मरता है और कहता है कि बंदूक होती तोा गोली मार देता और पुलिस दर्शक बन कर देखती रही।  ये हक़ किसने दिया विधायक जी को ?
मुस्लिम सवाल करते हैं बताइये देश द्रोही कौन ?



Tuesday, February 16, 2016

AMU के छात्र भी आए JNU छात्रसंघ के साथ, एएमयु में भी प्रदर्शन ।

अफजल गुरु के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित कराने और भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप में जेएनयू छात्रसंघ नेता की गिरफ्तारी के बाद भड़का विवाद अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) तक पहुंच गया है। मंगलवार (16 फरवरी) को अलीगढ़ में एएमयू के छात्रों ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में पुलिस की कथित ज्यादती के विरोध में प्रदर्शन किया। विभिन्न छात्र संगठनों, शिक्षक संघ और कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने जेएनयू के छात्रों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की। उनके हाथ में पोस्टर थे, जिन पर लिखा था, ‘‘राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और रोहित वेमुला के हत्यारों, हमें देशभक्ति ना सिखाओ।’’
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर मांग की है कि भारत के विश्वविद्यालयों में समस्या पैदा करने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संगठनों की भूमिका की जांच हो। एएमयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. मुजाहिद बेग ने कहा कि संकट की इस घड़ी में वे जेएनयू समुदाय के साथ हैं।
एएमयू कर्मचारी संघ के महासयिव शमीम अख्तर ने जेएनयू में प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रविरोधी नारे लगाये जाने की निन्दा की लेकिन सवाल किया कि क्या पुलिस ने नारेबाजी करने वालों की शिनाख्त की। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि वह आरएसएस से संबद्ध संगठनों के हाथ में खेल रही है।
उधर, मंगलवार को दिल्‍ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के पूर्व प्रोफेसर और संसद पर आतंकी हमले के आरोपी रहे एसएआर गिलानी को भी अरेस्‍ट किया गया। उन पर भी अफजल गुरू के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित करने और भारत विरोधी नारे लगाने का आरोप है। उनके ऊपर भी देशद्रोह का आरोप लगाया गया है। उन्‍हें दो दिन की पुलिस कस्‍टडी पर भेजा गया है।

Sunday, February 14, 2016

मेरा बेटा राष्ट्र विरोधी नहीं, वो हिंदुत्व की राजनीति का शिकार : कन्हैया के पिता जयशंकर सिंह

पटना। राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार के माता-पिता का कहना है कि उनका बेटा राष्ट्र विरोधी नहीं है, वह हिंदुत्व की राजनीति का शिकार हुआ है। कन्हैया कुमार के पिता जयशंकर सिंह ने शनिवार को कहा, “मेरा बेटा राष्ट्र विरोधी नहीं है। उसकी राष्ट्र विरोधी विचारधारा का कोई सवाल ही नहीं उठता। वह अपनी उम्र के हजारों युवाओं के समान ही राष्ट्रवादी है।”
कन्हैया कुमार की मां मीना देवी ने कहा कि उनका बेटा राष्ट्रवादी है, लेकिन वह आरएसएस-भाजपा की हिंदूवादी राजनीति का समर्थक नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें उसकी विचारधारा पर गर्व है। इसमें कुछ गलत नहीं है। वह दक्षिणपंथी राजनीति के खिलाफ लड़ रहा है और इसीलिए उसे निशाना बनाया गया है।” कन्हैया कुमार के माता-पिता बिहार के बेगूसराय जिले के मसलानपुर गांव में रहते हैं। यह जिला वामपंथी राजनीति का गढ़ माना जाता है।

सिंह ने कहा कि उनके बेटे को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की साजिश के तहत गिरफ्तार किया गया है। “वह वामपंथी पार्टी का कार्यकर्ता है और विरोधी पार्टी उसके खिलाफ गंदी राजनीति कर रही है।” कन्हैया की मां ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि उनका बेटा इस हिंदुत्व की राजनीति के खिलाफ लड़ाई जीत जाएगा।

कन्हैया के पैतृक स्थान के अधिकांश ग्रामीणों ने उसकी गिरफ्तारी को लेकर दुख जताया है। गौरतलब है कि कन्हैया कुमार को कथित तौर पर संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी पर चढ़ाए जाने की बरसी पर जेएनयू के छात्रों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भारत विरोधी नारे लगाने के लिए गिरफ्तार किया गया है।

Saturday, February 13, 2016

JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सबुत के तौर पर वीडियो जारी






9 फरवरी की शाम अफज़ल गुरू की याद में हुए प्रोग्राम के बाद प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय सुर्खियों में है। देश में राष्ट्रीय समाचार चैनलों का एक गुट जेएनयू और वहां पर सक्रिय वामपंथी संगठनों पर हमलावर है। समाचार चैनलों के कुछ एंकर इस विश्वविद्यालय को खुलेतौर पर देशद्रोहियों का गढ़ कह रहे हैं। जेएनयूएसयू के मौजूदा प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के बाद ऐसे चैनलों को अपने अजेंडा में कामयाबी भी मिल रही है।

हालांकि इसी दौरान सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ऐसे न्यूज़ चैनलों को एक्सपोज़ करने के अलावा एबीवीपी पर भी सनसनीखेज़ आरोप लगाए गए हैं। वायरल वीडियों में दावा किया गया है कि 9 फरवरी की रात जेएनयू कैंपस में वामपंथी छात्रों को फंसाने के मकसद से एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए थे।

'द कंस्प्रेसी' नाम से जारी इस वीडियो के मुताबिक 'जेएनयू के बारे में मीडिया जो दिखा रहा है, वह पूरी तरह से बायस्ड, अधूरा और सनसनीखेज है। वीडियो में जब पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे सुनाई दे रहे हैं, उस वक्त स्क्रीन पर एबीवीपी के कार्यकर्ता दिख रहे हैं। इसके बाद जब पीछे से पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारों की आवाज़ आ रही है तो वीडियो में दिख रहे एबीवीपी कार्यकर्ता जवाब में ज़िंदाबाद जिंदाबाद बोल रहे हैं।


वीडियो में मीडिया पर सवाल खड़ा करते हुए कहा गया है कि वह पूरा सच नहीं दिखा रहा है। दावा यह भी किया गया है कि यह एबीवीपी की साज़िश है ताकि गैर एबीवीपी छात्रों पर झूठे मुकदमे दर्ज करवाए जा सकें

कन्हैया की गिरफ्तारी ने ABVP, संघ और वर्तमान सरकार के स्पष्ट चेहरे को सामने ला दिया है। यह गिरफ़्तारी JNU के भविष्य और देश के लोकतंत्र के लिये खतरा। AIYFबिहार राज्य परिषद

कन्हैयार कुमार  कि गिरफ्तारी ने ABVP, संघ और वर्तमान सरकार के स्पष्ट चेहरे को सामने ला दिया है। यहJNU U के भविष्य और देश के लोकतंत्र के लिये खतरा। AIYF राज्य परिषद बिहार  इसकी घोर निंदा करती है।
ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन की बिहार राज्य परिषद जके सचिव  संजिव कुमार सिंह दुने जारी बेयान में कहा वाहर विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी एवं पिछले दो दिनों से ABVP एवं वर्तमान भाजपा सरकार की और से जो JNU को बद्नाम करने की शाजिशें रची जा रही है उसका घोर निंदा करती है। 
     जैसा की हमसब और पूरे देश की जनता JNU के इतिहास एवम् उसकी प्रगतिशील परंपरा को जानते है जो की दशकों से संघ परिवार और आज की वर्तमान सरकार के लिए लगातार चुनौती बनी हुयी है। उसी का परिणाम था कि संघ नेता सुब्रमण्यम स्वामी एवम् उसका मुख्य पत्र पञ्चजन्य ने आज से पांच महिने पहले हीं JNU को आतंकबाद का गढ़ कहा था और देश में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का केंद्र कहा था। और आज जब देश रोहित को न्याय की मांग कर रही है तो ABVP के हुड़दंग एवम् कुछ अज्ञात, नकबपोस चेहरे के नारे का बहाना बना JNU को पूनः बदनाम करने, वहां के लोकतांत्रिक माहोल को खत्म करने और छात्र आंदोलन को दमित करने का प्रयास कर रही है।
         AIYF कन्हैया की गिरफ़्तारी और इस पूरे घटना क्रम में ABVP, संघ, पूर्वी दिल्ली के भाजपा संसद महेश गिरी और आज के गृहमंत्री की करवायी जाहिर करती है कि JNU को बड़ी साजिश का हिस्सा बना वहां के लोकतांत्रिक माँहोल एवम् आंदोलनों को खत्म करने का प्रयाश है जिसे देश के विद्यार्थियों एवम् जनता को पूरी तरह वेनकाब करते हुए JNU एवम् देश के लोकतंत्र के रक्छा की अपील करते हैं।
     इसके साथ उन अज्ञात नकबपोस लोगों के नारों की निंदा करते हुए सरकार से उनकी पहचान कर फॉरन गिरफ़्तारी की मांग करते हैं। हमें ताज्जुब है कि जो लोग वर्षों से खुले में नारे लगते हुए देश एवम् देश की जनता के सवालों को उठाते रहे, और जो उस संगठन से जुड़ा है जो देश को आजाद करने के लिए असंख्य कुर्बानियां दी उस संगठन के नेता को देशद्रोही के आरोप मेँ गिरफ्तार किया गया है और हुड़दंग करने बाले, हमला करने बाले और नकबपोस खुले घूम रहे हैं।


JNU अध्यक्ष की गिरफ्तारी, लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला , जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार को सम्मानित करेगा रिहाई मंच

एसएफआई दफ्तर पर हमला करने वाले एबीवीपी के गुण्डों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए


लखनऊ 12 फरवरी 2016। रिहाई मंच ने जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को  देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किए जाने की कड़ी निंदा की है और इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए जेएनयू अध्यक्ष को सम्मानित करने का ऐलान किया है। मंच ने लखनऊ स्थित स्टूडेन्ट फेडरेशन आॅफ इंडिया (एसएफआई) के दफ्तर पर एबीवीपी के गुण्डों द्वारा हमले को संघ परिवार की दहशतगर्दी का एक और उदाहरण बताया है। 


रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने कहा कि अफजल गुरू की फांसी जिसपर पूरी दुनिया में देश की न्यायपालिका की बदनामी हो चुकी है, पर अगर किसी विश्वविद्यालय में छात्र बहस करते हैं तो इसे उनके लोकतांत्रिक अधिकार के तहत जोड़कर देखा जाना चाहिए। दिल्ली में झंडेवालान में जिस तरह से महिला प्रदर्शनकारियों को पुलिस के साथ मिलकर संघी गुण्डों ने मारा-पीटा जिसके वीडियो होने के बावजूद आजतक कोई कार्रवाई नहीं हुई वो साबित करता है कि राज्य की पूरी मशीनरी संघ के एजेण्डे पर काम कर रही है। जिस संघ परिवार का आजादी की लड़ाई में अग्रेजों के साथ मिली भगत का इतिहास रहा है, जिसका सिद्धांतकार माना जाने वाला सावरकर अंग्रेजों से माफी मांग कर जेल से रिहा हुआ हो, कांग्रेस में रहने के दौरान जेल जाने पर जब सभी कांग्रेसी हफ्तों आमरण अनशन पर बैठे हों जिसके कारण उनक वजन कम हो चुका हो तब हेडगेवार का जेलर से मिली भगत करके खाना खाना और अपना वजन 8 किलो बढा़ लिया हो और जिसके नेता अटल बिहारी वाजपेई ने 1942 में पुलिस की मुखबिरी करके क्रांतिकारी नेता लीलाधर वाजपेई को जेल भेजवा दिया हो उनसे बड़ा देशद्रोही आतंकी संगठन कोई नहीं है। इसलिए अफजल गुरू की फांसी पर बहस करने वाले छात्रों के बजाए संघियों को देश द्रोह के आरोप में जेल में ठूसा जाना चाहिए। 


रिहाई मंच नेता राजीव यादव ने कहा कि जिस संघ परिवार के लोगों का नाम देश भर में हुए आतंकी घटनाओं में नामजद है, जिसके नेता मोदी की तस्वीर असीमानंद जैसे दुर्दांत आतंकी के साथ सार्वजनिक हो चुकी हो, जिसके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृहमंत्री राजनाथ सिंह की महिला आतंकी साध्वी प्रज्ञा के साथ गोपनीय बैठक की तस्वीर हो, जिसके लोग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे की पूजा करते हों उस संगठन का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए। इस देशद्रोही विचारधारा का विरोध करने वाला हर व्यक्ति देश भक्त है। जेएनयू अध्यक्ष ने फासिस्ट निजाम के खिलाफ जो संघर्ष किया है उसके लिए रिहाई मंच कन्हैया कुमार का नागरिक अभिनंदन कर सम्मानित करेगा।


रिहाई मंच नेता शकील कुरैशी और अनिल यादव ने लखनऊ विधानसभा स्थित एसएफआई कार्यालय पर एबीवीपी द्वारा किए गए हमले को पूरे देश पर हो रहे भगवा हमले का ताजा उदाहरण बताया है। जिस तरह एबीवीपी के गुण्डों ने एसएफआई दफ्तर में लगी शहीद ए आजम भगत सिंह, अशफाक उल्ला खान और राम प्रसाद बिस्मिल की तस्वीरें तोड़ीं वह साबित करता है कि स्वतंत्रता आंदोलन में अंगे्रजों की दलाली करने वाले संघी उस आंदोलन के नायकों से कितना नफरत करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे अग्रेजों से माफी मांगने वाले संघी सावरकर की असली औलाद हैं। भारतीय संस्कृित और महिलाओं की बड़ी-बड़ी बात करने वाले लोगों ने महिला नेता सीमा राना के साथ मारपीट करके अपने महिला विरोधी चरित्र को फिर उजागर किया है। घटना के बाद एसएफआई के कार्यकताओं से मुलाकात करके लौटे रिहाई मंच नेता शकील कुरैशी और अनिल यादव ने कहा कि ठीक विधानसभा के सामने स्थित एसएफआई कार्यालय पर संघी गुण्डों द्वारा किया गया हमला बताता है कि सपा सरकार इन दहशतगर्दों को संरक्षण दे रही है। मंच ने मांग की कि दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने मांग की है कि विधानसभा के ठीक सामने स्थित भाजपा कार्यालय को तत्काल वहां से हटाकर विधानसभा की सुरक्षा को पुख्ता किया जाए। उन्होंने मांग की कि प्रदेश में संघ व भाजपा कार्यालयों पर सरकार सीसीटीवी कैमरा लगवाकर उनकी गतिविधियों पर नजर रखे। क्योंकि इन्हीें दफ्तरों से पूरे सूबे में सांप्रदायिक दहशतगर्दी और दंगों की रणनीति रची जाती है।  







Friday, February 12, 2016

JNU मामला : एक ही चैनल वहां कैसे तैनात था


ओम थानवी 
आज जेएनयू में कई छात्रों और शिक्षकों से बात हुई। दो छात्र वहां मौजूद थे, जहाँ हल्ला हुआ। दोनों ने कहा कि कश्मीर के नारे वहां लगे, पर पाकिस्तान जिंदाबाद के नहीं। वीडियो का भरोसा कई लोग न करते मिले, एक ही चैनल वहां कैसे तैनात था यह पहलू भी वीडियो एडिटिंग पर शक पैदा करता है। टीवी चैनल छात्रों के ऐसे आयोजनों को कब कवर करते हैं।
बहरहाल, कोई शिक्षक या छात्र ऐसा नहीं मिला जो पाकिस्तान के नारे लगाने को उचित समझता हो - चाहे वे लगे हों या न लगे हों।
जहाँ तक मेरी अपनी राय है (जिसे बिना जाने ही कुछ अतिउत्साही तो अपने स्वयंभू निष्कर्ष पर भी जा पहुंचे!), तो मेरा स्पष्ट मानना है कि नागरिकों की आजादी का दायरा बहुत व्यापक है। इस तरह छात्रों का भी। अगर वे कश्मीर की आजादी के नारे लगाते हैं, या अफ़ज़ल की फाँसी का विरोध करते हैं तो जहाँ तक उनके अधिकार का सवाल है इस अभिव्यक्ति में कुछ गलत नहीं। हालाँकि मैं कश्मीर की आजादी मांग को उचित नहीं मानता, पर फांसी के विरोध को सही मानता हूँ। ठीक इसी तरह आप या कोई भी उनसे असहमत हो सकता है, यहाँ तक कि कुछ समय बाद उनमें से कोई खुद अपने आप को अलग राय का पा सकता है। जैसा कि कल मैंने लिखा भी कि छात्र जीवन में विचार बनते-बिगड़ते ही आकार लेते हैं।
पाकिस्तान जिंदाबाद के नारों की पुष्टि भले नहीं हुई, फिर भी अपनी राय साफ रख दूँ - भारत में कोई ऐसे नारे नहीं लगा सकता, लगाए तो सर्वथा अनुचित होगा।
लेकिन एक बदनाम टीवी चैनल के संदिग्ध वीडियो के आधार पर कोई छात्र जमात को ही नहीं, देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय पर ताला जड़ने की बात कहे तो यह दुराग्रह की हद होगी। लोग जानते हैं कि प्रगतिशील विचारों के कारण जेएनयू बरसों से संघ परिवार की आँख की किरकिरी बना हुआ है। अब अपने लोग कोतवाल बने हैं तो हिसाब चुकता करने की बेचैनी मानो बढ़ चली है। अफसोस यही है कि राष्ट्रपिता गांधी के हत्यारे गोडसे का मंदिर बनने पर तो इनका राष्ट्रप्रेम दुबक जाता है, पर छात्रों के एक आयोजन का हल्लाछाप वीडियो देखकर वीरबालक की मुद्रा में विलाप की मानिंद जाग जाता है।


*ओम थानवी के फेस बुक वाल से