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Tuesday, September 15, 2015

बिहार चुनाव: बीजेपी की पहली लिस्ट जारी,नंदकिशोर यादव को पटना साहिब गया शहर सीट पर प्रेम कुमार को टिकट

पटना. बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी ने पहली लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में 43 कैंडिडेट्स के नाम शामिल हैं। बीजेपी की लिस्ट जारी होते ही सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी(RLSP) नाराज हो गई है। पार्टी का कहना है कि सीटों के तालमेल को लेकर बातचीत जारी थी। बातचीत पूरी होने से पहले ही बीजेपी ने अपनी लिस्ट जारी कर दी। ये गठबंधन धर्म के खिलाफ है।
जिन सीटों पर कैंडिडेट्स की घोषणा की गई है उन सभी पर पहले और दूसरे चरण में चुनाव होने हैं। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नंदकिशोर यादव पटना साहिब से चुनाव लड़ेंगे। चार बार से गया शहर सीट पर जीतने वाल प्रेम कुमार को एक बार फिर यहीं से उतारा गया है।
उम्मीदवारों की लिस्ट
बेतिया - रेणु देवी
पटना साहिब - नंदकिशोर यादव
रामगढ़ - अशोक सिंह
बोधगया - श्याम देव पासवान
मोतिहारी - प्रमोद कुमार
बेगूसराय - सुरेंद्र मेहता
अरवल - चितरंजन कुमार
औरंगाबाद - रामाधार सिंह
वजीरगंज - विजेंद्र सिंह
हिसुआ - अनिल कुमार सिंह
नोखा - रामेश्वर चौरसिया
बांकीपुर - नितिन नवीन
लखीसराय - विजय कुमार सिन्हा
झाझा - रविंद्र यादव
नवी नगर - गोपाल नारायण सिंह
गया शहर - प्रेम कुमार
बांका - रामनारायण मंडल
सूर्यगढ़ा - प्रेम रंजन पटेल
सराय रंजन - रंजीत निर्गुणी
रोसड़ा (एससी) - मंजू हजारी
तेघड़ा - रामलखन सिंह
मटिहानी - सर्वेश कुमार सिंह
बखरी (एससी) - रामानंद राम
परबत्ता - रामानुज चौधरी
बीहपुर - कुमार शेलेंद्र
गोपालपुर - अनिल यादव
पीरपैती - लल्लन पासवान
कटोरीया (एससी) - निक्की हेम्ब्रम
मुंगेर - प्रणव कुमार यादव
रजौली (एससी) - अर्जुन राम
हिसुआ - अनिल सिंह
मोहनीया (एससी) - निरंजन राम
चैनपुर - बृजकिशोर बिन्द
सासाराम - जवाहर प्रसाद
दिनारा - राजेंद्र सिंह
नोखा - रामश्वर प्रसाद चौरसिया
काराकट - राजेश्वर राज
गोह - मनोज शर्मा
गुरुवा - राजी दांगी
सीतामढ़ी - सुनील कुमार
बेनीपट्टी - विनोद नारायण झा
राजगीर - सत्यदेव नारायण आर्य
आरा - अमरेंद्र प्रताप सिंह

Saturday, September 12, 2015

राजस्थान की भाजपा सरकार नहीं देगी बक़रीद की छुट्टी, हाई कोर्ट जा सकता मुस्लिम समुदाय।



--फ़ैसल रहमानी
राजस्थान में मुस्लिम समुदाय के सरकारी कर्मचारियों के बीच सरकार के एक निर्देश को लेकर असंतुष्टि का माहौल देखा जा रहा है, और वह इसके खिलाफ़ हाई कोर्ट जाने पर भी विचार कर रहे हैं। राजस्थान सरकार ने 25 सितंबर को जनसंघ के विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर सभी प्राइवेट और सरकारी कॉलेजों में रक्तदान शिविर आयोजित करने का आदेश जारी किया है। ऐसे में रक्तदान शिविर आयोजन की यह तारीख़ ईद-उल-अज़हा यानी बक़रीद के दिन ही पड़ रही है, जिसके चलते हजारों मुस्लिम कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द हो जाएंगी। सभी प्राइवेट और सरकारी कॉलेजों के प्रधानाध्यापकों को राज्य सरकार द्वारा जारी सर्कुलर में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वह 24 सितंबर को किसी भी कर्मचारी को छुट्टी न दें। इस फैसले को लेकर विपक्ष ने भी सरकार की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी सरकार जानबूझ कर राज्य के धर्मनिरपेक्ष माहौल को खराब करने की कोशिश कर रही है। वहीं जमात-ए-इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय सेक्रेटरी सलीम इंजिनियर का कहना है कि यह मुस्लिम कर्मचारियों के मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन है। ईद-उल-अज़हा मुस्लिमों के प्रमुख त्योहारों में से एक है, और यह आयोजन लोगों को उनका त्योहार मनाने से रोक रहा है। हालांकि उनका कहना है कि यह स्वैच्छिक है, लेकिन सर्कुलर में स्पष्ट लिखा हुआ है कि किसी को भी छुट्टी न दी जाए। वे इस मामले को लेकर हाई कोर्ट जाएंगे।

Monday, July 27, 2015

भारत रत्न’ डॉ एपीजे अब्दुल कलाम नहीं रहे ।

जनता के राष्ट्रपति ‘भारत रत्न’ डॉ एपीजे अब्दुल कलाम नहीं रहे इस की सुचना पत्रकार वा भाई Syed Shahroz Quamar ने दी मुझे बहुत अफ़सोस हुआ. अभी कुछ ही घंटा पहले शिल्लोंग गए थे. हमारी मुलाक़ात 2010 में पहली बार Aadil Hasan Azad साथ हुई थी। लगभग एक घंटा समय कैसे बिता पता न चला. जब हमलोग लौटने लगे तो डॉ साहिब ने रोका और खुद वो अंदर जा कर अपनी पुस्तक लाई और भेंट की और बहार तक साथ आये और वहां खड़े अधिकारियों को कहा जब आएं मिलवा ना हम से। उस क बाद कई बार मिला। और हर बार कुछ ना कुछ सीखा।

कुछ समझ मे नहीं आरहा है किया लिखूं किया ना लिखूं बस अल्लाह से दुआ करता हूँ के जन्नतुल फ़िरदौस मैं आला मुक़ाम दे और उन के चाहने वाले को सब्र। डॉ कलाम को रामेश्वरम में सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की उपलब्धियां:
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भारत के पूर्व राष्ट्रपति और ‘भारत रत्न’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारत में मिसाइल मैन के नाम से भी जाने जाते थे। 1962 में वे 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन' में शामिल हुए। कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (SLV 3) बनाने का श्रेय हासिल है। 1980 में कलाम ने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था। उन्हीं के प्रयासों की वजह से भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया। इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने का श्रेय भी इन्हें प्रदान किया जाता है। 1982 में कलाम रक्षा अनुसंधान विकास संगठन, DRDO से जुड़े। कलाम के नेतृत्व में ही भारत ने नाग, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और अग्नि जैसे मिसाइल विकसित किए। 1997 में डॉ कलाम को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 2002 से 2007 के बीच डॉ कलाम, भारत के 11 वें राष्ट्रपति रहे। डॉक्टर कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी (गाइडेड मिसाइल्स)
को डिजाइन किया। खास बात यह है कि इन्होंने अग्नि एवं पृथ्वी जैसी मिसाइल्स को स्वदेशी तकनीक से बनाया। एपीजे अब्दुल कलाम ने विंग्स ऑफ फायर, इग्नाइटेड माइंड्स, इंडिया 2020 जैसी कई मशहूर और प्रेरणा देने वाली किताबें लिखी हैं।

"अगर किसी देश को भ्रष्टाचार – मुक्त और सुन्दर-मन वाले लोगों का देश बनाना है तो ,
मेरा दृढ़तापूर्वक मानना है कि समाज के तीन प्रमुख सदस्य ये कर सकते हैं. पिता, माता और गुरु.
अब्दुल कलाम
मिसाईल मैन
भारत रत्न
शिक्षक
प्रोफेसर
शिक्षा विद
एक महान व्यकित्व
हर दिल अजिज इंसान
पूर्व राष्ट्रपति
डा.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
को नम आंखो से विदाई
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मैं तुम्हे यूं भुला ना पाउंगा
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मेरे लिये ये व्यक्तिगत नुकसान है
जब से होश संभाला है
आपको अपना आदर्श माना है
ऐसे लोगों का शायद ही
कभी धरती पर पदार्पण होता है
मुझे अभी भी विश्वास नही होता की
आप हमारे बीच नहीं है
ऐसे महान आत्मा को शत् शत् नमन
भावभीनी श्रधांजलि

  • रामबाबू साह

फोटो आभार : आदिल के फेस बुक वाल से साथ मे मैं भी दिख रहा हूँ। 



Thursday, May 28, 2015

काश! दिलीप सॉरी कह देते तो मधु उनकी हो जाती।





वीर विनोद छाबड़ा 
दिलीप कुमार इश्क के मामले में हमेशा बदक़िस्मत रहे हैं। कामिनी कौशल से उनका लंबा इश्क़ चला। लेकिन कामिनी शादी शुदा थी। उसका पति बीएस सूद बंदूक लेकर सेट के आस पास घूमता रहता। फिर दिलीप किसी शादी-शुदा का घर तोड़ने की तोहमत अपने ऊपर लेना नही चाहते थे। 
दिलीप के दिल को अगला पड़ाव मधुबाला की दहलीज़ पर मिला। दोनों साथ-साथ तराना, संगदिल और अमर कर चुके थे। ‘नया दौर’(१९५७) फ्लोर पर थी। मधु भी जल्दी ही दिलीप के दिल के दरवाजे़ पर दस्तक देने लगी। दोनों बेसाख्ता मोहब्बत में डूब गये। परंतु मधु के निठल्ले पिता अताउल्लाह खान इस रिश्ते के सख़्त खि़लाफ़ थे। उन्हें डर था कि अगर कमाऊ चिड़िया हाथ से उड़ गयी तो दर्जन भर लोगों का परिवार कौन चलायेगा? इसी मुद्दे पर मधु इमोशनल हो जाती और दिलीप कुमार से दूर जाने की कोशिश करती। लेकिन बेमुरुव्वत मोहब्बत दूर होने न देती। मधु की हालत न जीने की थी और न मरने की। ऐसा ही कुछ दिलीप के साथ भी था। मगर मधु के पिता फूटी आंख नहीं सुहाते थे।
बी.आर.चोपड़ा से ‘नया दौर’ की शूटिंग के अनुबंध को लेकर अताउल्लाह खान का झगड़ा हुआ। मामला अदालत तक जा पहंचा। दिलीप ने बी.आर.चोपड़ा के पक्ष में गवाही दी। बताते हैं कि भरी अदालत ने दिलीप ने ऐलान किया कि वो मधुबाला से बेसाख़्ता मोहब्बत करते हैं। असर यह हुआ कि मधुबाला ‘नया दौर’ से बाहर हो गयी और साथ ही दिलीप की ज़िंदगी से भी। बाद में केस भी चोपड़ा के पक्ष में गया। लेकिन दिलीप के कहने पर बी.आर.चोपड़ा ने मधु को जिल्लत से बचाने के लिए केस वापस ले लिया। 
मधु ने किसी से कहा -आपकी चाहत यहां थी। मोहब्बत यहां थी। फिर आपने ऐसा क्यों किया? चोपड़ा साहब का साथ दे दिया। 
मगर दिलीप और मधु एक दूसरे के दिल से नहीं गये। निजी जिंदगी का असर प्रोफेशनल रिश्तों पर नहीं आये। इसके बहाने ‘दोनों मुगल-ए-आज़म’ करते रहे। मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोये...इस गाने में मधुबाला ने मानों दिल का हाल कह डाला। एक और सीन था जिसमें दिलीप कुमार एक पंख मधुबाला के चेहरे से छुआ कर मोहब्बत का इज़हार करते हैं। यह तस्वीर विश्व प्रसिद्ध लव सीन में शुमार की गयी। 
मधु के दिल में एक उम्मीद की किरण हमेशा रही। मधु ने दिलीप कुमार को पैगाम भिजवाया - साहेब मैं आपसे शादी करना चाहती हूं। बस एक बार आप अब्बू को सॉरी कह दें। अब्बू आपको गले लगा लेगें। सारे गिले-शिकवे जाते रहेंगे। घर के गोशे-गोशे में शहनाई गूंज उठेगी। आप सेहरा बांध कर आयेंगे। मैं तो कबसे 'कबूल' कहने को बेताब हूं। 
मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। सख्त नफरत के चलते दिलीप को अताउल्लाह खान से सॉरी कहना गवारा न था। और मधु बाप को नहीं छोड़ सकती थी। 
ये नामुराद दिल होता ही ऐसा है। बात-बात पर टूटता है और सख़्त इतना कि पत्थर पिघल जाये मगर दिल नहीं। 
दिलीप ने जब १९६६ में सायरा बानो से शादी की तो मधुबाला ने कहा- साहब मेरे हिस्से में थे ही नहीं। जिसका था वो ले गयी। 
२३ फरवरी, १९६९ को मधु तमाम दुख-दर्द और हसरतें लिये इस दुनिया से रुखसत हो गई। उनकी ख्वाईश थी कि उनके जनाज़े में साहेब शामिल न हों। इत्तिफ़ाक़ से उस दिन दिलीप शूटिंग के सिलसिले में बंबई में नहीं थे। जब लौटे तो सीधे मधुबाला की कब्र पर गये और...। 


  • वीर विनोद छाबड़ा  के फेस बुक वाल से आभार 

Tuesday, May 19, 2015

विभिन्न मंत्रालयों के 75 विभागों में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की सुविधा शुरू !

केंद्र सरकार के दफ्तरों में बाबुओं और अफसरों से मिलने के लिए अब रोजाना चक्कर नहीं काटने होंगे। चाहे मंत्रालय हो या विभाग, सभी को निर्धारित समय पर घर बैठे अपॉइंटमेंट मिलेगा। मुलाकात के लिए तय समय की जानकारी ई-मेल या एसएमएस के जरिए दी जाएगी।
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) ने किसी जरूरतमंद को सरकारी बाबुओं-अफसरों से मिलने के लिए आसान हल निकाला है। इसकी शुरुआत राजधानी में स्थित केंद्रीय मंत्रालयों के 75 विभागों में की गई है। आने वाले समय में देशभर में केंद्र के सभी विभाग के दफ्तर को इसमें शामिल किया जाएगा। साथ ही आम जनता को यह सुविधा मुहैया कराने का सुझाव राज्य सरकारों को भी दिया जाएगा। फिलहाल, विभिन्न मंत्रालयों के 75 विभागों में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की सुविधा शुरू की है।
इसके लिए http://evisitors. nic.in/public/Home.aspx पर जाकर एक क्लिक करना होगा। जवाब में आपके ई-मेल या एसएमएस पर तय समय पर मिलने का समय दिया जाएगा। एक अधिकारी के मुताबिक, यह आवेदन कोई भी कर सकता है। इसके लिए सबसे पहले वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करके आवेदक को खुद से जुड़ी जानकारी मुहैया करानी होगी। आवेदक को न्यू विजिटर पर क्लिक करके अपना नाम, पता, आईडी कार्ड और जिस मंत्रालय या विभाग के अधिकारी से मिलना है, उसका नाम और वजह भी स्पष्ट करनी होगी।
साथ ही आवेदक अपनी ओर से भी मिलने की तारीख व समय लिख सकता है। हालांकि, दिए समय पर मिलना अधिकारी के व्यस्त नहीं होने पर ही संभव होगा। आवेदक के पास पहुंचने वाले ई-मेल या एसएमएस में एक नंबर मुहैया कराया जाएगा। आवेदक को यह संबंधित विभाग में रिसेप्शन पर देना होगा। यहां आवेदक का फोटो लेकर पास दिया जाएगा। एक बार रजिस्ट्रेशन करा चुके आवेदक को दोबारा प्रक्रिया की जरूरत न होगी।