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Monday, February 22, 2016

'जेएनयू की जिस छात्रा की पुलिस को तलाश, वह है बिहार के भोजपुर की शान

चिंटू कुमारी 

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में देश विरोधी नारे लगने की घटना के बाद दिल्ली पुलिस पूछताछ के लिए छात्रसंघ की जिस पूर्व जनरल सेक्रटरी चिंटू कुमारी की तलाश कर रही है, वह भोजपुर जिले स्थित कोलोडिहरी गांव के हरिजन टोला की शान हैं।

चिंटू जब पढ़ाई के लिए दिल्ली आई थीं तब इसमें सीपीआई(एम-एल) ने काफी मदद की थी। बाद में उनका दाखिला जेएनयू में हुआ जहां वह एमफिल कर रही हैं। 20 साल की चिंटू 2014 में ऑल इंडिया स्‍टूडेंट्स असोसिएशन (आईसा) के टिकट पर छात्रसंघ का चुनाव लड़कर जनरल सेक्रटरी बनी थीं।

चिंटू के पैरंट्स आईसा के पैरंट ऑर्गनाइजेशन सीपीआई (एम-एल) के सदस्‍य हैं। बिहार में जब जातिवाती हिंसा का खूनी दौर चल रहा था और रणवीर सेना ने 1996 में जब बथानी टोला नरसंहार को अंजाम दिया था तब उनके पिता रामलखन ने छिपकर अपनी जान बचाई थी। मजदूरी में बढ़ोतरी की मांग को लेकर वह खेतिहर मजदूरों के आंदोलन का नेतृत्‍व कर चुके हैं जिसकी वजह से ऊपरी तबके के लोगों में उनके खिलाफ गुस्‍सा था।


चिंटू की मां सरोजिनी रोजी-रोटी के लिए चूड़‍ियां बेचने का काम करती हैं। वहीं उनसे छोटी दो बहनें सीपीआई (एम-एल) की मदद से ही दिल्‍ली में पढ़ाई कर रही हैं। उनके भाई संदीप आरा के सीपीआई(एम-एल) दफ्तर में ही रहते हैं और कॉलेज की पढ़ाई कर रहे हैं।

जब सरोजिनी को जेएनयू की घटना के बारे में पता चला तो वह काफी परेशान हो गईं। अपनी बेटी को देशद्रोही करार दिए जाने से वह काफी दुखी हैं। उन्‍होंने कहा, 'हमने सिर्फ यही चाहा कि हमारे बच्‍चे पढ़-लिख जाएं ताकि वे देश की सेवा कर सकें। हमने यह कभी नहीं चाहा कि वे कमाकर हमें खिलाएं या फिर हमारे लिए घर बनवाएं।' सरोजिनी ने कहा कि उनका परिवार तहेदिल से लेफ्ट विचारधारा को मानता है, लेकिन वे देशद्रोही नहीं हैं।

सरोजिनी ने अपनी बेटी को देशद्रोही करार दिए जाने के लिए केंद्र सरकार को जिम्‍मेदार ठहराया। जब चिंटू के सरेंडर करने की बात पूछी गई तो उन्‍होंने सवाल खड़े किए और पूछा कि उसे सरेंडर क्‍यों करना चाहिए। उन्‍होंने कहा, 'वह इसलिए सरेंडर करे ताकि भगवा ब्रिगेड से जुड़े काले कोट वाले लोग पुलिस के सामने उसकी पिटाई करें जैसा कि उसके दोस्‍त कन्‍हैया कुमार की हुई।' एनबीटी

Saturday, February 20, 2016

प्रधानमंत्री को अब देश की जनता को बताना चाहिए कि उनकी नजर में देशद्रोह की परिभाषा क्या है ? :नितीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) मामले में केन्द्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के इतने दिन गुजर जाने के बाद भी पुलिस उसके खिलाफ देशद्रोह का सबूत नहीं जुटा सकी, तो देशद्रेाह का आरोप कैसा? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अब देश की जनता को बताना चाहिए कि उनकी नजर में देशद्रोह की परिभाषा क्या है?

नीतीश ने कन्हैया कुमार के खिलाफ सबूत की मांग करते हुए कहा कि भाजपा खुद इस भावनात्मक मुद्दे को उठाकर अन्य मुद्दे को खत्म करना चाहती है। पटना में जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी के संबंध में पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक प्रश्न पर उन्होंने केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, भाजपा ने जबरन इस मुद्दे को उछाला है, ताकि लोगों का ध्यान दूसरी ओर ले जाया जा सके। भाजपा विकास के सभी मोर्चे पर विफल साबित हो गई है। अब उसने भावनात्मक मुद्दे को उठाया है जिससे अन्य मुद्दों से लोगों का ध्यान हट जाए।
उन्होंने कहा कि इतने दिन गुजर जाने के बाद भी कन्हैया के खिलाफ न गृह मंत्रालय और न ही दिल्ली पुलिस सबूत जुटा सकी है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि आखिर कोई सबूत तो लाएंगे न? मुख्यमंत्री ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि केन्द्र सरकार जेएनयू जैसे शिक्षण संस्थानों को ध्वस्त करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जेएनयू में उनकी विचारधाराओं को नहीं मानने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है, इसलिए अपने विचारों को थोपने के लिए ये सब किया जा रहा है।
भाजपा द्वारा बिहार में "जंगलराज" कहे जाने पर भी नीतीश ने हमला बोलते हुए कहा, लोग बिहार में जंगलराज होने का आरोप लगाते हैं, ऐसे लोगों को अब बताना चाहिए कि दिल्ली में पटियाला हाउस अदालत परिसर में पुलिस की मौजूदगी में जो हमले हुए, तो जंगलराज कहां है